सोमवार, 29 जून 2009

ईश्वर का अस्तित्व

[1]
ईश्वर का अस्तित्व
- Kaushalya
जहाँ सवाल उठता है की....
ईश्वर की सत्ता की अस्तित्व है भी या नहीं....
वहां अन्दर से एक आवाज़ आती है....
की पता नहीं.
नजाने लोग क्या सोचते है,
हम क्या सोचते है
फिर भी....
हम उसकी मौजूदगी को नकारते नहीं....
क्योकि वो अपनी अनुभूति करवा कर ,
हमारे एहसास में जिन्दा हो जाता है.
पता नहीं....दुनिया किसके नेतृत्व पर चलती है
मालूम नहीं कोन है इसका कर्ता,
कोन संभालता है इसके शासन की बागडोर को....
वो अपनी अनुभूति की प्रतीति क्यों करवाता है.
जब की हमने उसे देखा नहीं...सुना नहीं...
फिर भी हम उसकी हाजरी को नकारते क्यों नहीं...
वरण सहर्ष स्वीकार करते है,
और उस पर ही सब छोड़ देते है...
क्यों....
आखिर क्यों....
*
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[2]
ईश्वर की पहचान
- Kaushalya
ईश्वर शायद
इस प्रकृति में बसा हुआ है....
हमारी अनुभूतियों में है...
नदियों की लहेरो में है....
गाते हुए पंछियो में है....
धरती की मिट्टी में है....
फोलों की खुशबू में है...
चाँद की रोशनी में है...
तारों की टीम-टीम में है...
पेड़ - पौधों में है....
बारिश की बूंदों में है...
लहराते हुए खेतो में है...
दिलों की धड़कन में है....
सूरज की किरणों में है....
ईश्वर शायद,
सर्व व्यापक है...
वो कण-कण में समाया हुआ है।

*

6 comments:

प्रकाश गोविंद ने कहा…

यार मेरे भाई
यही सवाल मैं इतनी मुद्दत से पूछ रहा हूँ कि
जब ईश्वर कण-कण में है तो
इंसान उसकी तलाश में जंगलों ... पहाडों .. मंदिरों में
क्यों भटक रहा है ?

जब वो निराकार है तो ये लोग कौन हैं जो घरों और मंदिरों में भोग और चढावे का आनंद लेते हैं !

आज की आवाज

प्रकाश गोविंद ने कहा…

कृपया वर्ड वैरिफिकेशन की उबाऊ प्रक्रिया हटा दें !
इसकी वजह से प्रतिक्रिया देने में अनावश्यक परेशानी होती है !

तरीका :-
डेशबोर्ड > सेटिंग > कमेंट्स > शो वर्ड वैरिफिकेशन फार कमेंट्स > सेलेक्ट नो > सेव सेटिंग्स

Abhi ने कहा…

check this cool link
http://jabhi.blogspot.com

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर ने कहा…

narayan narayan

राजेंद्र माहेश्वरी ने कहा…

जो शास्त्रों के पीछे दौडता हैं, वह पंडित है। और जो सत्य के पीछे दौडता, वह संत हैं। पंडित शास्त्रो के पीछे दौडता है। जबकि संतक े पीछे शास्त्र दौडतें है। शास्त्र पढकर जो बोले वह पंडित और सत्य पाकर जो बोले वह संत है। पंडित जीभ से बोलता है, संत जीवन से बोलता हैं, जिसका जीवन बोलने लगे, वह जीवित भगवान है।

KAUSHALYA VAGHELA ने कहा…

Sukriya....

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