बेटियाँ (२० मार्च बेटियाँ दिवस)
- Kaushalya
नन्ही सी कली होती है बेटियाँ..फूलों जैसी कोमल होती है ये..
कभी दादा जी की लाडली..
तो कभी पापा की परी,
माँ की दुलारी होती है,
तो कभी..
भैया की नन्नी सी राजकुमारी,
बहन की सखी होती है..
तो कभी सहेलियों की प्यारी..
बेटियाँ चहकती हुई चिड़ियाँ है,
जिसकी चहक से आँगन गूंज उठता है..
उसकी बोली से,..
खुशियों की बरसात होती है..
बेटियाँ हमारा ह्रदय होती है..
जिसे देखकर मन आत्मतृप्त होता है..
ऐसी होती है बेटियाँ..
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