क्रान्तिकारी बना दिया
- Kaushalya
क्यों जिंदगी सरल नहीं होती,
क्यों अपने अधिकार हक़ से नहीं मिलते,
जीवन की आपाधापी (Onslaught) ने आज,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया।
?
ये संघर्षमय जीवन ने हमे,
हर कदम अस्तित्व के लिए ,
लड़कर जीना सिखा दिया,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया।
?
यही है वास्तविकता जीवन की,
ना मिले माँगने से तो,
छिन कर जीना सिखा दिया,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया
?
क्या जिंदगी का दस्तूर है ऐसा,
सीधे मनुज हो उनको ही सताना,
अन्याय और धोखे ने आज,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया।
?
जहाँ धरा है मौन हमने,
वहीँ पर गुनहगार ठहरा दिया,
न्याय मिलने की जिज्ञासा ने,
हमे क्रान्तिकारी बना दिया।
?
क्या कहे अंतर विषाद को,
जिंदगी की ठोकरों ने आज,
ज़माने की नज़रों में,
क्रान्तिकारी बना दिया।
क्रान्तिकारी बना दिया।
? ? ?
(यह रचना मन: क्रांति पर आधारित है)

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