रविवार, 19 जुलाई 2009

सवेरा

सवेरा
- Kaushalya
कितना हसीन है मौसम,
परिंदों के कलरव से उठा सवेरा,
रंग-बे-रंगी आसमान से आच्छादित सृष्टि सारी,
सूर्योदय की किरणों ने बिखेर दिया अपना साम्राज्य,
शबनम ने लहरायी अपनी भीगी चुनरियाँ,
मन्द-मन्द समीर के झोंके आ रहे,
मयूर की आवाज़ से गूंज उठा सवेरा,
फूलों ने मुस्कुराकर अपनी खुश्बू बिखेर दी,
मन्दिर की घंटी का मधुर स्वर है दिशाओं में,
वातावरण की हलकी शान्ति ने चित्त चुराया,
खुशनुमा नज़ारा देखते ही मन् प्रफुल्लित हो उठा।
^_^

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें