कब आयेगा वो दिन..
- Kaushalya
कब आयेगा नवोदित सूरज..चारों ओर प्रसरेगी शांति..
न रहेगा कोई बैरी-दुश्मन..
न रहेगी अंतर की आग (Jealousy)..
चारों ऋतुएं होंगी सुख से भरपूर..
न रहेगा कोई वाणी-विग्रह..
कब होगा सुनहरा हर पल..
जहाँ होगी स्नेह की संपत्ति..
जहाँ हो मानवता का भाईचारा..
कब होगी सफलता से प्रगति..
कब होगा ऐसा..
भूखे पेट ना सोयेगा कोई..
महंगाई का होगा ना मार..
कब होगा पैसों के मूल्यों का क्षय..
कब होगी पुरुषोत्तम की पूरी परिकल्पना..
कब आयेगा वसुधैव कुटुम्बकम का राज..
कब मिटेगी मन् की मलिनताएँ..
कब मिटेगा धार्मिकता के नाम का पाखंड..
कब होंगे सब धर्म एक समान..
..जहाँ..
ना रहेगा कोई ऊंच-निच का भेद..
ना होंगे दंगे-फसात का खेल..
ना होगा अन्याय किसीसे..
..जाने..
कब होगा नव युग का निर्माण..
कब होगा यह स्वप्न साकार..
कब आयेगा नव सूरज..
आह्ह्ह...
आखिर, कब आयेगा वो दिन..
,...
1 comments:
महसूस करें तो ही आएगे ऐसे दिन...शानदार लिखा..."
एक टिप्पणी भेजें