मंगलवार, 15 दिसंबर 2009

करुणा

करुणा
- Kaushalya
इन सब की करुणा तो देखिये...
सूरज खुद तप कर,
अंधकार दूर कर के,
संसार को उजाला देता है

चाँद के पास जो शीतल रोशनी है,
वो खुद के पास न रखकर,
सारी सृष्टि को शीतलता प्रदान करता है

नदियों के पास अखूट जल स्रोत है,
वो अपने लिए न संचित कर,
जगत के कल्याण में बाँट देती है

फूलों से उसकी खुश्बू जुडी हुई है,
कभी भेद-भाव नहीं करते सौरभ बिखेरने में,
अपितु समग्र वातावरण को पुलकित कर देते है

प्रकृति में पेड़ की सहनशीलता तो देखिये,
खुद धूप में तप कर, मौसमी तूफ़ान झेलकर
हमे छाँव ,फल और आरक्षण देते है ।
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