रविवार, 20 दिसंबर 2009

होंशले बुलंद है दोस्त

होंशले बुलंद है दोस्त
- Kaushalya
होंशले बुलंद है दोस्त
चाहे गीर जाए
चाहे ठोकर खाए
चाहे ज़ख्मी हों
फिर भी,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
हर तूफ़ान का करेंगे सामना
कफ़न ये बांध लिया है शर पर
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
डट गए तो फिर से उठेंगे
सँभालेंगे अपना दामन
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
ज़ालिम ज़माने की करेंगे न परवा,
मुँह तोड़ जवाब देंगे उसका
आगे कि ओर कूच कर गए कदम
मुड़ के न देखे दोबारा न नयन हमारे
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
जंग-ए-ऐलान का बिगुल बजा दिया
आजाये जो कोई हो दुश्मन
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
अन्याय और अत्याचार नहीं सहेंगे
चेहरे पर आएगी मुस्कुराहट वापस
करेंगे अपने सपने पुरे
बहारें आयेगी फिर से
क्योंकि,
होंशले बुलंद है ए दोस्त
*
जल उठी क्रांति की ज्वाला
होगी नवयुग की स्थापना
क्योंकि,
होंशले बुलंद है अपने
नव चेतन से भरा आया
'नवयुग'
*

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