रविवार, 20 दिसंबर 2009

तूफ़ान-ए-गुस्सा

तूफ़ान-ए-गुस्सा
- Kaushalya
गुस्सा है गुस्सा मेरा,
नहीं है कोई आग,
जिसे पानी से बुझाई जाए
*
नाही ..कोई हवा है
जिसे कैद की जाए,
*
नहीं है रत कोई
जो चाँदनी से शीतल हो जाए,
*
नहीं है नदी का पानी
जो लहरों में बह जाए,
*
नहीं कोई खुश्बू जो,
फ़िज़ाओ में बिखर जाए,
*
और नहीं है कोई गीत
जो गुन-गुना लिया जाए,
*
नहीं कोई दिशा जो
बाँट दिया जाए,
*
ये तो..
तूफ़ान है तूफ़ान
जिसे रोकना मुश्किल ही नहीं
ना मुमकिन भी है,
*
इस आफत पर लिखा गया
तुम्हारा नाम है :X
*
..सावधान..
*
आक्रमण
*

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