- Kailash Vaghela
"नयी द्रष्टि... नयी सोच... नए तरीके और नयी कहानी ।"
'YOUR DESTINY ON MY WAY'

एक नगर में एक साधू महात्मा आए हुए थे। राजा जी ने जब ये बात सुनी तब उनहोंने साधू महात्मा को राजमहल पधारने के लिए निमंत्रण भीजवाया। साधू जी ने राजा जी का निमंत्रण स्वीकार कर राजमहल पहुंचे।
राजा जी ने उनके स्वागत में हो सके उतनी सारी सेवायें दी।
साधू जी अब वहां से जाने लगे तब राजा जी ने उनको विनती की की - "कुछ सिख देते जाएँ"
तब साधू महात्मा ने उनके हाथों में एक कागज़ की बन्ध पर्ची देते हुए कहा की - " इसे तब खोलना जब आप पर बहुत भारी संकट या मुश्किल आन पड़े"
इतना कह कर साधू ने राजा जी से विदा ली।
कुछ सालों बाद राजा जी के नगर पर दुसरे राजा ने चडाई कर दी।
इस युद्ध के दौरान उनकी सारी सम्पति और राज खजाना सब खर्च हो गया।
तब राजा जी को वो साधू महात्मा की दी हुई पर्ची याद आयी...
उनहोंने पलभर की भी देर किए बगैर वो पर्ची को खोला।
उस में लिखा था - " यह भी नहीं रहेगा"
राजा सब समझ गए। अभी उनका बुरा वक्त चल रहा है। यह ज्यादा दिन नहीं रहेगा।
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[बोध :- सुख-दुहाख हो या मुश्किल परिस्थिति यह सब स्थायी नहीं है । उसके लिए शोक नहीं करना चाहिए। ]
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