इलज़ाम है हम पर
- Kaushalya
चुराया है हमने उनका नाम
इतना बड़ा इलज़ाम लगाया हमारे नाम
जैसे हमने....
आसमान के तारों को चुराकर, अपना दामन सजा लिया ।
फूलों से उसकी खुश्बू चुराकर, उनका नाम परिमल रख दिया ।
जैसे क्षीर सागर से मूल्यवान रत्न चुराकर,
उनका नाम अनमोल रख दिया
बन की खामोशी चुराकर, उनका नाम वनराज रख दिया
झीलों की शान्ति चुराकर, उनका नाम अमन रख दिया
जुगनुओं की रोशनी चुराकर, उनका नाम रोनक रख दिया
आकाश की विशालता चुराकर, उनका नाम अम्बर रख दिया
झूमते बादल की आकृति चुराकर, उनका नाम स्वरुप रख दिया
चंद्रमा की शीतल चाँदनी चुराकर, उनका नाम ब्रीजेश रख दीया
वेदों की ऋचाओं ने अवतार लिया
ओमकार के रूप में , और
ओमकार का नाद चुराकर, उनका नाम सोहम् रख दिया
कमल की कोमलता चूराकर, उनका नाम पुष्कर रख दिया
पर्वतो का अल्लड़पन चुराकर, उनका नाम हिमालय रख दिया
रिश्तो की नजाकत चुराकर, उनके साथ रिश्ता जोड़ लिया
ह्रदय की भावनाओं से चाहत चुराकर
उनका नाम प्रेम रख दिया
....क्या सही किया,....
उन्होंने हम पर नाम चुराने का
यह इलज़ाम लगाकर
हमे गुनाहगार का खिताब दे दिया।
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