मुखौटा : चेहरे पर चेहरा
- Kaushalya
क्यों विश्वास के नाम से
होता है विश्वासघात
क्यों सच्चाई के नाम पर
होते है जूठ के सवालात
क्यों भरोसे के नाम पर
होता है धोखा
क्यों महोब्बत के नाम पर
होता है दिखावा-छल
क्यों दिल तोड़ते है
वफ़ा के नाम से
क्यों दिल्लगी करते है
दिल लगाने के नाम से
क्यों हक़ीकत के नाम से
करते है अभिनय
नाहीं रुकती है और
नाहीं बढ़ती है
वहीं की वहीं ठहरकर जिंदगी
क्यों पुनरावर्तित होती है।
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