तू ही मेरा महबूब
- Kaushalya
जब इबादत में खुदा की,_
ये हाथ उठाते हैं_
उस वक़्त इन आँखों में,_
एक ही चेहरा रहता है...._
होठों पर एक ही नाम रहता है_
हर दुआ में तू इस कदर सामिल है_
जैसे, फूलों में खुश्बू _
इस भरी महफ़िल के आलम में_
हर आहट तेरे आने की खबर देता है,_
नज़ाने कैसा है ये एहसास_
चेहरे पर गभराहट सी छायी हुई है
मन् में एक सूकुन की लहर बह रही है_
तेरे आगमन से महफ़िल रोशन हो गयी_
तेरे सजदे में ये कब से बेकरार है_
जैसे जान सी आ गयी और_
महसूस हो रहा है जैसे,_
जीवन जिंदगी से भरपूर है।
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ए ख़ुदाया मुझे माफ़ करना_
तेरी हर इबादत में पहले_
मेरा महबूब का नाम है सामिल,_
लगता है जैसे..._
महाबूब और रब में फ़र्क ही नहीं रहा।
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