शुक्रवार, 24 जुलाई 2009

बरखा : मौसम - ऐ - शरारत

बरखा : मौसम-ऐ-शरारत
- Kaushalya
  • करवट बदली मौसम ने,
  • और अंगडाई ली हवाओं ने
  • लहरायी चुनरियाँ बदलो ने,
  • आसमान में फैलाया आँचल
  • धरती ने सज़ा रूप नया
  • चारों तरफ फैली हरियाली
  • देखो वो....
  • उमड़-घूमड़ बादल दौड़े आ रहे
  • बिजली ने भी मृदंग नाद छेड़ दिया
  • पवन ने भी तूफान का रूप धारण कर लिया
  • मोहे लागे प्यारे ये सब नज़ारे
  • शरारत तो देखिए मौसम की,
  • झूमता हुआ सावन आया
  • याद ले आई आपकी
  • मन चाहे कि....
  • ये उमड़-घूमड़ बदलियाँ
  • ले आए आपको हमारे पास
  • और मेघ बन बरसे आप का स्नेह
  • बारिस की बूँदो ने, छेड़ दिए मान के तार
  • जी चाहे....ये शमा यही ठहर जाए
  • मंद-मंद पवन मे लहराई है झुल्फ,
  • कुन्तल पर बूँद सजी कुंदन की।
  • मयूर की तरह थिरकट लेता हुआ
  • आया सावन चित्त चुराने
  • प्रफुल्लित हो उठा मेरा मन
  • आयी ऋतु रंग सजाने की,
  • प्रकृति से मन तक पहुँचने की।
  • ***

અવસર (अवसर)

અવસર
- Kaushalya
અવસર મડ્યો આજ ગુમવવો નથી,
બે મીઠી વાત કરી લવ તમારી સાથ.
આ અમૂલ્ય ક્ષણ હવે વેડફવી નથી,
યાદગાર બનવી લવ મારી આ સ્મૃતિ.
અવસર આવો મડે ના ફરી,
આવ કરિશ્મા સર્જાતા હોય છે કદી.
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अवसर
- Kaushalya

अवसर मिला है आज गुमाना नहीं,
दो मीठी बात कर लू आपके साथ।

ये अमूल्य क्षण अब गवाना नहीं है ,
यादगार बना लू अपनी ये स्मृति।

अवसर ऐसा मिले न फ़िर से,
ऐसे करिश्मा सृजन होता है कभी।

*

सोमवार, 20 जुलाई 2009

आपका आना

आपका आना
- Kaushalya
सुरमयी शाम लाती है रात का पैगाम ,
होती है हर रात की सुबह नयी,
भोर से होती है हर दिन की शुरुआतनयी,
वैसे ही....
आप आए सुबह की भोर बनके,
और मेरे जीवन की हुयी शुरुआत नयी।
(*_*)

कविता की रचना

कविता की रचना
- Kaushalya
पुराना ही ये स्वर है,
अंकुर फूटे मन् में,
इसलिए लगता नया है।
वही है शब्द भंडार,
इर्द-गिर्द बिखरे शब्द,
पिरोये एक माला में,
बन गई नयी सचना,
उसका नाम रखा कविता।
***

रविवार, 19 जुलाई 2009

सवेरा

सवेरा
- Kaushalya
कितना हसीन है मौसम,
परिंदों के कलरव से उठा सवेरा,
रंग-बे-रंगी आसमान से आच्छादित सृष्टि सारी,
सूर्योदय की किरणों ने बिखेर दिया अपना साम्राज्य,
शबनम ने लहरायी अपनी भीगी चुनरियाँ,
मन्द-मन्द समीर के झोंके आ रहे,
मयूर की आवाज़ से गूंज उठा सवेरा,
फूलों ने मुस्कुराकर अपनी खुश्बू बिखेर दी,
मन्दिर की घंटी का मधुर स्वर है दिशाओं में,
वातावरण की हलकी शान्ति ने चित्त चुराया,
खुशनुमा नज़ारा देखते ही मन् प्रफुल्लित हो उठा।
^_^