शनिवार, 5 सितंबर 2009

तू ही मेरा महबूब

तू ही मेरा महबूब
- Kaushalya
हर दुआ में तुम हो सामिल_
जब इबादत में खुदा की,_
ये हाथ उठाते हैं_
उस वक़्त इन आँखों में,_
एक ही चेहरा रहता है...._
होठों पर एक ही नाम रहता है_
हर दुआ में तू इस कदर सामिल है_
जैसे, फूलों में खुश्बू _
इस भरी महफ़िल के आलम में_
हर आहट तेरे आने की खबर देता है,_
नज़ाने कैसा है ये एहसास_
चेहरे पर गभराहट सी छायी हुई है
मन् में एक सूकुन की लहर बह रही है_
तेरे आगमन से महफ़िल रोशन हो गयी_
तेरे सजदे में ये कब से बेकरार है_
जैसे जान सी आ गयी और_
महसूस हो रहा है जैसे,_
जीवन जिंदगी से भरपूर है।
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ए ख़ुदाया मुझे माफ़ करना_
तेरी हर इबादत में पहले_
मेरा महबूब का नाम है सामिल,_
लगता है जैसे..._
महाबूब और रब में फ़र्क ही नहीं रहा।
*^*^*^*^*

साथी

साथी
- Kaushalya
जिन्दगी जीने का बहना ढूंढती है,
तेरे दिल में आशियाना ढूंढती है,
तू कहे अगर हाँ तो,
जीने का मगसद मिल जाये कोई,
नहीं तो राहों में पड़े है यूँही
गर तू कहे हाँ तो....
रुकने की वजह मिल जाये कोई,
खड़े है राहों में साथी,
तू मिले तो मंज़िल मिल जाये कोई .
~^~^~^~

ख़ामोश जज़्बात

ख़ामोश जज़्बात
- Kaushalya
बोलने की हमारी फ़िकरत नहीं,
जताने की हमारी आदत नहीं

निभायें जाते है रिश्तो को,
जो आए हमारे हिस्से,

नहीं किसी से कोई गिला
और नहीं शिकायत किसी से

बस यूँही मुस्कुराये जाते है
आपकी मुस्कुराहट के लिए ।
***

बुधवार, 5 अगस्त 2009

जा रे मेघ जा (Special For My Brother)

जा रे मेघ जा (Special For My Brother)

- Kaushalya

जा रे मेघ जा...

दूर मेरे भाई के , देश जा...

नील गगन में झूमते बादल

झूमकर मेरे भाई की गली जा

जा रे मेघ जा....


जा सन्देश दे मेरे भैया को

दूर बेठी बहना याद करे

जा रे मेघ जा....


राखी का त्योहर है आया

जा सन्देश देके आ..

जा रे मेघ जा....


पलके बिछाए पथ पर तेरे,

तेरी बहना राह तके है

जा उसको कह आ..

जा रे मेघ जा....


ख़ुशी के अवसर पर भैया,

बाँट न दिखलाना,

तुम जल्दी आजाना

जा रे मेघ जा...


दूर मेरे भैया के, देश जा

जा रे मेघ जा....

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રક્ષાબંધન Special

રક્ષાબંધન Special
- Kaushalya

નથી લોહી ની સગાઈ
નથી સહોદર ભાઈ
તેમ છતાં આજ આપણે
ભાઈ-બહેન ના બંધને ગૂંથાયી ગયા
લાગે છે ઍમ
પૂર્વ જન્મ ના ઋણાનુબંધ થી
આજ વિધાતા ના લેખે કરી
પવિત્ર સંબંધ સ્થપાયી ગયા
નારિયેળી પૂનમ ના દિવસે
નથી કર્યા કોઈ પૂજન
પરંતુ,
ઉદિત સૂરજ નુ કુમ-કુમ તિલક કરી
કિરણો રૂપી અક્ષતથી વધાવી લીધા
લઈ લાગણી રૂપી રેશમની દોર
હૈયાની અંતર રૂપી કલાઈ પર
ભાવ કેરી રાખડી બાંધી દીધી
આજ રક્ષાબંધન ના શુભ અવસર પર
ભાઈ ઍ બહેન ને અને બહેને ભાઈ ને
યાદ કેરી ત્યોહાર ને વધાવી લીધા.
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