शनिवार, 25 जुलाई 2009

इलज़ाम है हम पर

इलज़ाम है हम पर
- Kaushalya
वो कहते है....
चुराया है हमने उनका नाम
इतना बड़ा इलज़ाम लगाया हमारे नाम
जैसे हमने....
आसमान के तारों को चुराकर, अपना दामन सजा लिया ।
फूलों से उसकी खुश्बू चुराकर, उनका नाम परिमल रख दिया ।
जैसे क्षीर सागर से मूल्यवान रत्न चुराकर,
उनका नाम अनमोल रख दिया
बन की खामोशी चुराकर, उनका नाम वनराज रख दिया
झीलों की शान्ति चुराकर, उनका नाम अमन रख दिया
जुगनुओं की रोशनी चुराकर, उनका नाम रोनक रख दिया
आकाश की विशालता चुराकर, उनका नाम अम्बर रख दिया
झूमते बादल की आकृति चुराकर, उनका नाम स्वरुप रख दिया
चंद्रमा की शीतल चाँदनी चुराकर, उनका नाम ब्रीजेश रख दीया
वेदों की ऋचाओं ने अवतार लिया
ओमकार के रूप में , और
ओमकार का नाद चुराकर, उनका नाम सोहम् रख दिया
कमल की कोमलता चूराकर, उनका नाम पुष्कर रख दिया
पर्वतो का अल्लड़पन चुराकर, उनका नाम हिमालय रख दिया
रिश्तो की नजाकत चुराकर, उनके साथ रिश्ता जोड़ लिया
ह्रदय की भावनाओं से चाहत चुराकर
उनका नाम प्रेम रख दिया
....क्या सही किया,....
उन्होंने हम पर नाम चुराने का
यह इलज़ाम लगाकर
हमे गुनाहगार का खिताब दे दिया।
****

हम-तुम

हम-तुम
- Kaushalya
आपका आना लगता है कैसा
सच कहु या चुप रहु
कुच्छ समझ में ना आए
कैसी मुश्किल है ये
जानते है वो भी
और जानते है हम भी
नहीं बोले गये जो शब्द
आप बताए हल इसका क्या
मन में खुश है वो भी
पर है खामोश खड़े
ये देखते ही
इतराते है हम भी
जादू है जैसे कोई
उनके आगमन में..
*

मुखौटा : चेहरे पर चेहरा

मुखौटा : चेहरे पर चेहरा
- Kaushalya
क्यों विश्वास के नाम से
होता है विश्वासघात

क्यों सच्चाई के नाम पर
होते है जूठ के सवालात

क्यों भरोसे के नाम पर
होता है धोखा

क्यों महोब्बत के नाम पर
होता है दिखावा-छल

क्यों दिल तोड़ते है
वफ़ा के नाम से

क्यों दिल्लगी करते है
दिल लगाने के नाम से

क्यों हक़ीकत के नाम से
करते है अभिनय

नाहीं रुकती है और
नाहीं बढ़ती है

वहीं की वहीं ठहरकर जिंदगी
क्यों पुनरावर्तित होती है।
*

तुम्हारी याद

तुम्हारी याद
- Kaushalya
जब बात कोई निकले,
मुझे तुम याद आए
जब ज़िक्र किसिका हो, मुझे तुम याद आए
ना जाने हर बात पर, मुझे तुम याद आए
कहीं ख्वाब कोई देखा, मुझे तुम याद आए
जब सुनी कोई सरगम, मुझे तुम याद आए
शमा की हर शै पर , मुझे तुम याद आए
मौसम के हर रुख़ पर, मुझे तुम याद आए
खुशियाँ ही खुशियाँ हो जब, मुझे तुम याद आए
एहसास नया हो जब, मुझे तुम याद आए
तन्हाइयों में जब मेरी, मुझे तुम याद आए
ये आँख हुयी नम तो, मुझे तुम याद आए
आहट सी कोई आये तो, मुझे तुम याद आए
मेरी सोच की गहराई में, मुझे तुम याद आए
मेरी उलझी हुई दुनिया देख,
मुझे तुम याद आए ।
*

અષાઢી મેઘ

અષાઢી મેઘ
- Kaushalya
ભીની માટી ની સોડમ આવે,
મને બચપન ની યાદ સાંભરી,

આજ આ ખુશનુમા મૌસમ માં
મન મૂકી ઝૂમવા ચાહે,

મન પ્રફુલ્લિત છે આજ,
ભીંજાય જાવ આજ મન મૂકી

ઝરમર મેહ વરસે આજ,
માટી ની મહેક પ્રસરી રહી

અષાઢની રઢિયાળી રાત માં,
મન પણ તેના રંગ માં રંગાવા ચાહે....
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